INDIA गठबंधन पर बयानबाजी तेज, JDU और AAP में तीखी राजनीतिक तकरार
Rhetoric over the INDIA alliance intensifies
पटना। Rhetoric over the INDIA alliance intensifies, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा द्वारा INDIA गठबंधन के कमजोर होने के लिए अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
आम आदमी पार्टी ने इस टिप्पणी पर कड़ा पलटवार किया है।
सोमनाथ भारती ने जदयू पर साधा निशाना
AAP नेता सोमनाथ भारती ने कहा कि संजय झा को विपक्षी दलों की राजनीति पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने जदयू के नेतृत्व और भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े किए।
नीतीश और निशांत का नाम लेकर हमला
सोमनाथ भारती ने तंज कसते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर राज्यसभा भेज दिया गया, जबकि उनके बेटे निशांत कुमार को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि जदयू को पहले अपने घर के हालात देखने चाहिए।
क्या कहा था संजय झा ने?
दरअसल, एक इंटरव्यू में संजय झा ने दावा किया था कि INDIA गठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी की राजनीति से हुआ।
उनके अनुसार गठबंधन के भीतर सहमति बनने के बाद भी कई दल अलग राह पर चलते रहे, जिससे विपक्षी एकता कमजोर हुई।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी बरसे भारती
संजय झा के बयान का जवाब देते हुए सोमनाथ भारती ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जब तक INDIA गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस और राहुल गांधी के हाथ में रहेगा, तब तक इस गठबंधन का कोई विशेष राजनीतिक मतलब नहीं रह जाएगा।
लोकसभा चुनाव का दिया उदाहरण
भारती ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने AAP के लिए वैसा समर्थन नहीं दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में AAP की हार पर कांग्रेस नेताओं ने खुशी जताई थी।
ममता-केजरीवाल मुलाकात पर क्या बोले?
ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल की हालिया मुलाकात पर सोमनाथ भारती ने कहा कि दो बड़े नेताओं की मुलाकात में राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
उन्होंने संकेत दिया कि विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर बातचीत हुई होगी।
INDIA बैठक से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
INDIA गठबंधन की बैठक से पहले नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी ने विपक्षी खेमे के भीतर मतभेदों की चर्चा को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी चुनावों के मद्देनजर गठबंधन की दिशा और नेतृत्व को लेकर बहस आगे भी जारी रह सकती है।